Israel-Hamas War: त्रिपुरा के आकार के इस छोटे से देश के पास मदद के लिए क्यों भागे-भागे जा रहे अमेरिका-ब्रिटेन? जानिए क्या है वजह

Israel-Hamas War News: इजरायल और हमास के बीच जंग ने दुनिया को टेंशन में कर दिया है. सबसे ज्यादा टेंशन इस बात की है कि हमास ने लोगों को अगवा कर लिया है.

Israel-Hamas War: हमास के लड़ाकों ने जब 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला किया, तो उस वक्त उन्होंने न सिर्फ इजरायलियों की हत्या की, बल्कि लोगों को अगवा भी किया. दरअसल, हमास के लड़ाके पैराग्लाइडर्स के जरिए गाजा पट्टी के करीब हो रहे एक म्यूजिक फेस्टिवल में लैंड हुए. उन्होंने यहां पर गोलीबारी की और फिर वे लोगों को अगवा कर उन्हें गाजा पट्टी लेकर चले गए. अगवा किए गए लोगों को अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा जैसे मुल्कों के नागरिक भी हैं. 

हमास ने दावा भी किया है कि उसने 250 के करीब इजरायली और विदेशी नागरिकों को अगवा किया हुआ है. उसका कहना है कि वह उन्हें तभी छोड़ेगा, जब इजरायल की जेल में बंद उसके सदस्यों को रिहा किया जाएगा. हालांकि, मानवीय आधार पर हमास ने दो अमेरिकी नागरिकों को हाल ही में रिहा भी किया है. लेकिन अगवा किए गए लोगों की रिहाई के पीछे एक देश का बहुत बड़ा हाथ रहा है. इस देश की वजह से अमेरिका को अपने नागरिक मिल पाए हैं. 

किस देश ने निभाई रिहाई बंदियों की रिहाई में भूमिका? 

दरअसल, हम जिस देश की बात कर रहे हैं, वह कतर है. अरब की खाड़ी में मौजूद ये छोटा सा मुस्लिम बहुल देश पिछले कुछ सालों में विश्व पटल पर बहुत तेजी से उभरा है. कतर ने ही हमास के लड़ाकों से बात कर अमेरिका के नागरिकों को रिहा करवाया है. ऐसे में अब ब्रिटेन, कनाडा जैसे पश्चिमी मुल्क कतर के पास जा रहे हैं और उससे अनुरोध कर रहे हैं कि वह उनके नागरिकों को भी गाजा पट्टी में हमास की कैद से रिहा करवाए. 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अमेरिकी नागरिकों की रिहाई में मदद करने के लिए कतर को शुक्रिया भी कहा है. कतर भले ही दुनिया के सबसे छोटे मुल्कों में से एक हो, मगर उसने वैश्विक राजनीति में अपनी भूमिका को दिनों दिन बड़ा किया है. अगर कतर के आकार की बात करें, तो ये भारत के त्रिपुरा राज्य के आकार का है. कतर का क्षेत्रफल 11,571 km² है, जबकि भारत का त्रिपुरा राज्य 10,486 km² का है. 

किन देशों ने मांगी कतर से मदद? 

अमेरिका के भले ही दो नागरिक हमास की कैद से आजाद हो गए हैं, मगर अभी उसके कुछ नागरिक गाजा में कैद हैं. ऐसे ही ब्रिटेन-कनाडा के नागरिक भी हमास लड़ाकों की कैद में हैं. यही वजह है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सुनक जब इजरायल गए, तो उन्होंने खाड़ी मुल्क में जाकर कतरी शेख तमीम बिन हामिद अल थानी से मुलाकात की और अपने नागरिकों को भी रिहा करवाने की अपील की. अमेरिका भी कतर से अपने बचे हुए नागरिकों की रिहाई के लिए मदद मांग चुका है. 

कनाडा ने भी ऐलान कर दिया है कि वह कतर संग बातचीत करने वाला है, ताकि हमास लड़ाकों की कैद से अपने नागरिकों को रिहा करवा पाए. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शनिवार को कहा कि हमास के जरिए बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कनाडा कतर के साथ काम करना जारी रखेगा. ऐसा ही अन्य पश्चिमी मुल्क भी कर रहे हैं. कतर का हमास पर अच्छा खासा कंट्रोल है और उसके इस चरमपंथी संगठन से अच्छे रिश्ते बताए जाते हैं. 

कतर कैसे हमास से रिहा करवा पा रहा है बंदी? 

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के पास बड़ी मात्रा में तेल और गैस का भंडार है. इसके जरिए उसने जो पैसा बनाया है, उसे उसने ताकत बढ़ाने में लगाया है. कतर का अल-जजीरा नेटवर्क दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इसके जरिए वह अपनी सॉफ्ट पावर दुनिया तक पहुंचाता है. उसने हाल के सालों में अपने राजनयिक संबंध पश्चिमी देशों संग बढ़ाए हैं. कतर अपनी विदेश नीति पर भी लगातार काम कर रहा है. कतर ने हाल ही में फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन भी किया था. 

कतर में हमास का राजनीतिक ऑफिस भी है. राजधानी दोहा में ही हमास का चीफ इस्माइल हानिया भी रह रहा है. हमास के राजनीतिक ऑफिस को 2012 में खोला गया था. इस ऑफिस के जरिए ही कतर हमास संग संबंध बनाए हुए हैं. अगर किसी मुल्क को हमास के साथ आधिकारिक तौर पर बात करनी होती है, तो वह कतर में मौजूद इस ऑफिस के जरिए ही संवाद कर पाते हैं. कतर भी खुद यहां से ही बात कर कैदियों को रिहा करवा रहा है. 

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