Amit Shah In Parliament: लोकसभा में इस सांसद से परेशान हो गए अमित शाह, स्पीकर से बोले- ‘अध्यक्ष महोदय मुझे प्रोटेक्शन दीजिए’

Amit Shah On POK: जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने सदन में कहा कि POK पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर-लाल नेहरू की गलतियों का परिणाम है. इसके बाद सदन में खूब हंगामा हुआ.

Amit Shah On Jammu & Kashmir Bill: संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है. इसमें खासतौर पर जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2023 पर चर्चा को लेकर हंगामा बरपा है. बुधवार (6 दिसंबर) को शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस विधेयक पर अपनी बात रखते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. 

गृहमंत्री अमित शाह ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर जब सदन में बयान दिया तो कांग्रेस सांसदों से उनकी बहस हुई. इसी बीच जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधित) विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी से भी तीखी नोक-झोंक हुई. 

“अध्यक्ष महोदय मुझे इनसे संरक्षण चाहिए”
अमित शाह जब जवाब देने की कोशिश कर रहे थे तब मनीष तिवारी लगातार बोले जा रहे थे, जिसके बाद अमित शाह ने उनसे संरक्षण की मांग लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से की. शाह ने कहा, “अध्यक्ष महोदय मैं इस तरह से नहीं बोल सकता. मुझे इनसे संरक्षण चाहिए.” शाह ने कहा, “महोदय मुझे व्यवस्था बना करके दीजिए ताकि मैं जवाब दे सकूं. मैं ऐसे इनका जवाब नहीं दे सकता.” इस बीच मनीष तिवारी बोले जा रहे थे और लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला उन्हें चुप कराकर केंद्रीय गृहमंत्री की ओर बोलने का इशारा कर रहे थे.  

जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन को लेकर हो रही थी चर्चा
दरअसल संसद में संशोधित विधेयक में जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन को लेकर दो दिनों से चर्चा हो रही थी, जिसका जवाब अमित शाह दे रहे थे. इस दौरान मनीष तिवारी ने कहा कि संशोधित विधेयक में पुनर्गठन और राज्यों की विधानसभा भंग करने को लेकर प्रावधान ही नहीं है. इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने विधेयक के उस खंड को पढ़ा, जिसमें इस प्रावधान का जिक्र है और कहा कि मनीष तिवारी ने पूरा नहीं पढ़ा है. इसके बाद तिवारी खड़े हुए और लगातार बोल रहे थे, जिसके बाद शाह ने संरक्षण मांगा.

 पीओके जवाहरलाल नेहरू की गलती
जम्‍मू और कश्‍मीर का भविष्‍य तय करने वाले बिलों पर चर्चा का जवाब देते हुए संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “जवाहर लाल नेहरू की गलती से पीओके बना है. सेना जीतने वाली थी पर नेहरू ने कश्मीर जीते बिना ही सीजफायर का ऐलान किया. शाह ने आगे कहा, जमीन चली गई और नेहरू जी ने बोला ब्लंडर हो गया. शाह के बयान के बाद संसद में हंगामा शुरू हो गया.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “दो बड़ी गलतियां पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री काल में उनके लिए हुए निर्णयों से हुईं, जिसके कारण कश्मीर को कई वर्षों तक नुकसान उठाना पड़ा. पहला है, जब हमारी सेना जीत रही थी तब युद्धविराम की घोषणा करना. सीजफायर लगाया गया, अगर तीन दिन बाद सीजफायर होता तो PoK आज भारत का हिस्सा होता. दूसरा है अपने आंतरिक मुद्दे को UN में ले जाना.”

पीएम मोदी ने पोछे कश्मीरियों के आंसू
अमित शाह ने कहा जब जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद शुरू हुआ और आतंकवाद ने हर किसी को निशाना बनाकर भगाया तो घड़ियाली आंसू बहाने वाले मैंने बहुत नेता देखे. शब्दों से सांत्वना देने वाले मैंने बहुत नेता देखे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने सही मायने में पीड़ितों के आंसू पोछने का काम किया है.

पीओके हमारा है”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2023 पर कहा, ‘पहले जम्मू में 37 सीटें थीं, अब 43 हैं. कश्मीर में पहले 46 थीं, अब 47 हैं और PoK में 24 सीटें आरक्षित कर दी गई हैं, क्योंकि PoK हमारा है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2023 पर कहा, “पाकिस्तान ने 1947 में कश्मीर पर हमला किया, जिसमें लगभग 31,789 परिवार विस्थापित हुए.1965 और 1971 के युद्धों के दौरान 10,065 परिवार विस्थापित हुए. 1947, 1965 और 1969 के इन तीन युद्धों के दौरान कुल 41,844 परिवार विस्थापित हुए. यह यह बिल उन लोगों को अधिकार देने का, उन लोगों को प्रतिनिधित्व देने का एक प्रयास है.

“जब बंगाल में हमारी सरकार आएगी तब आप समझोगे”
चर्चा के दौरान लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधिक रंजन चौधरी ने अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने को गलत करार दिया. इसके जवाब में अमित शाह ने कहा, “कश्मीर में धारा 370 खत्म होने के बाद कश्मीर में एम्स आदि सुविधाएं आईं. अमन और शांति का वातावरण आया है. ये बात आप नहीं समझोगे दादा जब बंगाल में हमारी सरकार आएगी तब आप समझोगे बंगाल में शांति का वातावरण क्या होता है.’ आपको बता दें कि जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2023 लोकसभा से पारित हुए हैं.

Leave a Comment

Scroll to Top