भारत में पिछले 5 सालों में तेजी से बढ़ा ‘रिलीजियस टूरिज्म’, जानिए कैसे धर्म-आस्था बना अर्थव्यवस्था के लिए वरदान

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अपने एक बयान में कहा था कि राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में टूरिज्म 4 गुना बढ़ जाएगा.

22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम होने वाला है. इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए न सिर्फ भारत से बल्कि विदेशों से भी लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं. 

इस मंदिर के अभिषेक की तारीख तय होने के साथ चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है. कुछ लोग मंदिर की भव्यता को लेकर चर्चा कर रहे हैं. तो कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर की स्थापना से अयोध्या का काफी आर्थिक विकास होगा. दरअसल वर्तमान में भारत में रिलीजियस टूरिज्म यानी धार्मिक पर्यटन ने आर्थिक विकास के नए द्वार खोले हैं.

ऐसे में इस रिपोर्ट में जानते हैं कि धार्मिक टूरिज्म किस प्रकार से देश की अर्थव्यवस्था के विकास में अपना योगदान दे रहा है….

सबसे पहले धार्मिक पर्यटन के विकास के पीछे की वजह समझिए 

धर्म, यह एक ऐसी चीज है जो सभ्यता के विकास के साथ ही किसी न किसी तरह मनुष्य के जीवन का हिस्सा बनती गई. भारत में तो धार्मिक पर्यटन की जड़ें प्राचीन काल से ही विद्यमान है. प्राचीन काल से ही यात्री आध्यात्मिक सांत्वना पाने के लिए कठिन यात्रा करते थे. 

इसके अलावा लगभग हर धर्म के व्यक्ति की इच्छा होती है कि जिंदगी में कम से कम एक बार अपने धर्म से संबंधित तीर्थ स्थान की यात्रा जरूर करें. अब भारत की बात करें तो इस देश में लगभग सभी धर्म के लोग रहते हैं और पुरानी सभ्यताओं वाला देश होने के कारण भारत में सभी धर्मों से संबंधित तीर्थ स्थान भी मौजूद हैं.

अपनी विविध धार्मिक परंपराओं के कारण भारत दुनियाभर से लाखों तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है. अजमेर शरीफ, सारनाथ, महाबोधि मंदिर, तिरुपति बालाजी स्वर्ण मंदिर, वैष्णो देवी सहित भारत में ऐसे कितने तीर्थ स्थान है जहां साल भर पर्यटकों या श्रद्धालुओं का आना जाना बना रहता है. 

मिडिल क्लास परिवार धार्मिक टूर करना करते हैं पसंद 

भारत में ज्यादातर मध्यवर्गीय परिवार ऐसे हैं जो टूर पर जाने का खर्चा नहीं उठा पाते हैं, ऐसी स्थिति में वो ज्यादा से ज्यादा मंदिरों की यात्रा करते हैं ताकि इस यात्रा के बहाने वह एक तीर्थ स्थल का दर्शन भी कर लें और वह क्षेत्र घूम भी सकें. 

क्या होता है धार्मिक पर्यटन 

धार्मिक पर्यटन कोई नया नाम या कॉन्सेप्ट नहीं है. लोग युगों-युगों से धार्मिक स्थलों की यात्रा करते रहे हैं. लेकिन, कुछ दशकों पहले तक यह यात्रा समाज के उच्चतम वर्ग के लोगों तक ही सीमित थी. लेकिन आज धार्मिक पर्यटन एक विशिष्ट बाजार है, जिसमें लोग धार्मिक स्थलों, तीर्थ स्थलों को देखने के लिए देश और विदेशों में यात्रा करते हैं. 

कैसे रिलीजियस टूरिज्म अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है

दरअसल भारत के हर राज्य में कोई न कोई तीर्थ स्थल है. इन तीर्थ स्थानों के आसपास रहने वाले बहुत से लोगों के लिए यह मंदिर रोजगार का स्रोत भी है. इस तीर्थस्थल के कारण स्थानीय लोगों को फूल, प्रसाद बेचने जैसे छोटे मोटे काम कर कमाने का मौका मिल जाता है.

इतना ही नहीं अगर कोई तीर्थ स्थान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हो जाए तो वहां पर यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगती है. जब किसी स्थान पर देश विदेश से लोगों का आवागमन होने लगता है तो वहां ट्रांसपोर्ट, होटल इंडस्ट्री, फूड इंडस्ट्री सभी का तेजी से विकास होने लगता है. 

इसके अलावा इससे स्थानीय सामानों की बिक्री में भी बढ़ जाती है. जिससे सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी वृद्धि होती है और राज्य और देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ता है.

अब क्योंकि भारत में धार्मिक पर्यटन के लिए बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और प्रवासी भारतीय आते हैं इसलिए इससे सरकार को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की भी प्राप्ति होती है. 

भारत में हुई थी बौद्ध और जैन धर्म की शुरुआत 

भारत में ही बौद्ध और जैन धर्म की शुरुआत हुई थी. इस देश में सारनाथ, कुशीदेव, बौद्ध गया जैसे कई तीर्थ स्थल है जहां हर साल दक्षिण एशियाई देश जैसे चीन, जापान, म्यांमार से लाखों लोग दर्शन करने आते हैं. इन विदेशी धार्मिक पर्यटकों और प्रवासी पर्यटकों के आने से सरकार को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की भी प्राप्ति होती है.

घरेलू धार्मिक पर्यटन भी बेहद महत्वपूर्ण

ये तो हुई विदेशी पर्यटकों की बात लेकिन भारत के अंदर के धार्मिक पर्यटकों को भी कम नहीं आंका जा सकता है. क्योंकि धार्मिक पर्यटन में घरेलू पर्यटकों का योगदान सबसे ज्यादा है. साल 2022 में पूरे भारत में 1731 मिलियन अधिक घरेलू पर्यटक आए. जिसमें से 30 प्रतिशत से ज्यादा पर्यटक धार्मिक पर्यटन के परपस से यात्रा पर थे.

क्या वाकई राम मंदिर से अयोध्या में बढ़ेगें टूरिस्ट

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अपने एक बयान में कहा था कि राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में टूरिज्म 4 गुना बढ़ जाएगा. योगी के इस भविष्यवाणी को काशी विश्वनाथ के आंकड़े कहीं न कहीं सच साबित करते हैं. काशी विश्वनाथ में जीर्णोद्धार के बाद सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर से पर्यटकों की संख्या बढ़ गई. 

आंकड़े बताते हैं कि जहां एक साल पहले तक जहां 80 लाख पर्यटक आते थे वहीं 2021 में हुए जीर्णोद्धार के बाद एक साल में करीब 7 करोड़ 20 लाख लोग आए. इतना ही नहीं साल 2022 तक काशी विश्वनाथ का दान 500 फीसदी तक बढ़कर 100 करोड़ हो गया.

आंकड़ों से समझिए धार्मिक पर्यटन देश के लिए कितना फायदेमंद 

रिलीजियस टूरिज्म के मामले में पर्यटन मंत्रालय के नए आंकड़े हैरान करने वाले हैं. साल 2022 में मंदिरों से कुल कमाई 1.34 लाख करोड़ हुई. जो 2021 में 65 हजार लाख के आसपास थी. इससे एक साल पहले यानी साल 2020 में 50,136 करोड़, 2019  में 2,11,661 करोड़ और 2018 में 1,94,881 करोड़ की कमाई हुई थी.

यानी तीर्थ स्थल से कमाई का आंकड़ा दोगुना रफ्तार में आगे बढ़ा है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर अगर आस्था से व्यापार ऐसे ही बढ़ता रहा तो देश कोरोना से पहले वाली ग्रोथ स्पीड में जल्द ही आ जाएगा.

पिछले 5 सालों में बूम हुआ धार्मिक पर्यटन 

साल 2022 में उत्तराखंड के चार धामों की यात्रा करने लगभग 40 लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे. जबकि यही आंकड़ा साल 2019 में 32 लाख का था. श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के आंकड़ों की मानें तो साल 2018 में यहां 7,32,241 तीर्थयात्रियों, 2019 में 10,00,021 तीर्थयात्रियों, 2020 में 1,34,881, 2021 में 2,42,712 तीर्थयात्रियों और 2022 में 14,25,078 तीर्थयात्रियों ने केदारनाथ मंदिर के दर्शन किये.

सरकार के आंकड़ों की मानें तो साल 2022 के जुलाई महीने में वाराणसी में 40.03 लाख घरेलू पर्यटक पहुंचे. जबकि एक साल पहले यानी जुलाई 2021 में यह आंकड़ा 4.61 लाख का था. इस आंकड़े से साफ है कि पिछले एक साल में वाराणसी में 10 गुना पर्यटकों की बढ़ोतरी हुई. वहीं विदेशी पर्यटकों की बात करें तो 2021 के जुलाई में वाराणसी में केवल 72 विदेशी पर्यटक पहुंचे थे. लेकिन यही आंकड़ा साल 2022 के जुलाई में बढ़कर 12,578 हो गया. पिछले साल की तुलना में लगभग 174 गुना बढ़ोतरी.

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने क्या प्रयास किए

बीते कुछ सालों में धार्मिक पर्यटन पर जोर देने के लिए सरकार द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं. इनमें सबसे प्रमुख कार्य बुनियादी ढांचे के निर्माण से जुड़ा हुआ है. बीते कुछ सालों में सरकार ने तीर्थ स्थानों तक पहुंचने के लिए रोडवेज, सड़क और एयरपोर्ट का निर्माण किया है. ताकि वहां पहुंचने की इच्छा रखने वाले पर्यटकों को ज्यादा मुश्किलों का सामना न करना पड़े. 

इसके अलावा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार कई योजनाएं चला रही है. जैसे की पर्यटन मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही प्रसाद योजना. इस योजना के तहत सेलेक्टिव तीर्थ स्थानों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण किया जा रहा है. इसके अलावा पंजाब सरकार ने निशुल्क तीर्थ यात्रा योजना की शुरुआत की है. जिसके अंतर्गत 7 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को निशुल्क तीर्थ यात्रा कराई जाती है. 

भारत में धार्मिक पर्यटन के विकास में अभी भी मौजूद हैं चुनौतियां 

  • भारत में हर धर्म के लोग रहते हैं. ऐसे में कभी कभी किसी विशेष धर्म के धार्मिक स्थल का विकास राजनीति का विषय भी बन जाता है. राजनीतिक दल इसे वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं.
  • प्रशासन में व्यापक भ्रष्टाचार भी धार्मिक पर्यटन के विकास में बहुत बड़ी बाधा है. 
  • दिव्यांग लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास में कमी है. यही कारण है कि दिव्यांग लोग कई धार्मिक स्थलों पर नहीं जा पाते.

आगे की राह 

दरअसल भारत धार्मिक पर्यटन एक बहुआयामी उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है. ऐसे में भारत इस क्षेत्र में खुद को वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर सकता है. लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी है कि पर्यटन की क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों को दूर किया जाए.    

Leave a Comment

Scroll to Top