ना-ना करते बीजेपी से मिल गए एचडी देवेगौड़ा, कर्नाटक में कांग्रेस के ‘ऑपरेशन पंजा’ का क्या होगा?

सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि कांग्रेस के कथित ऑपरेशन पंजा (हस्त) का अब क्या होगा? हाल ही में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जेडीएस और बीजेपी के विधायकों के टूटने की बात कही थी.

90 साल के एचडी देवेगौड़ा और 80 साल के बीएस येदियुरप्पा ने कर्नाटक की सियासत में फिर से नई पटकथा लिख दी है. पहली बार देवेगौड़ा की सहमति से जेडीएस ने बीजेपी के साथ गठबंधन का ऐलान किया है. कर्नाटक चुनाव के बाद से ही दोनों के बीच गठबंधन की चर्चा जोरों पर थी. 

शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री के आवास पर जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने जेपी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात की, जिसके बाद गठबंधन का ऐलान किया गया. दोनों दलों की गठबंधन ने राज्य की सत्ताधारी दल कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है. 

सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि कांग्रेस के कथित ऑपरेशन पंजा (हस्त) का अब क्या होगा? हाल ही में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जेडीएस और बीजेपी के विधायकों के टूटने की बात कही थी.

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बीजेपी-जेडीएस गठबंधन को कर्नाटक की राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि देवेगौड़ा परिवार की यह पार्टी कर्नाटक में तीसरी बड़ी ताकत है. दोनों दलों के बीच अगर वोट ट्रांसफर सही तरीके से हो गया, तो शिवकुमार के मिशन-20 का खेल भी खराब हो सकता है.

देवेगौड़ा-येदियुरप्पा ने गठबंधन की स्क्रिप्ट कैसे लिखी?
मई 2023 में कर्नाटक चुनाव के नतीजे आए, जिसमें कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला. बीजेपी के साथ-साथ जेडीएस भी चुनाव में बुरी तरह हार गई, जिसके बाद दोनों पार्टी में उथल-पुथल जारी रहा. कांग्रेस के ‘ऑपरेशन पंजा’ की भी सियासी गूंज रही.

इसी बीच जुलाई 2023 में एचडी देवेगौड़ा ने गठबंधन पर फैसला लेने के लिए अपने बेटे एचडी कुमारस्वामी को अधिकृत कर दिया. देवेगौड़ा कांग्रेस के उस एक्शन से नाराजा थे, जिसके तहत उन्हें बेंगलुरु में इंडिया गठबंधन की बैठक में नहीं बुलाया गया था.
 
देवेगौड़ा ने उस वक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर निशाना भी साधा था. देवेगौड़ा ने कहा था कि नीतीश कुमार मुझे इंडिया की मीटिंग में बुलाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने विरोध कर दिया. देवेगौड़ा ने अकेले चुनाव लड़ने की बात कही.

गठबंधन पर देवेगौड़ा से फ्री-हैंड मिलने के बाद एचडी कुमारस्वामी ने अपने आवास पर सभी बड़े नेताओं की मीटिंग बुलाई, जिसमें देवेगौड़ा और सीएम इब्राहिम भी शामिल थे. इस मीटिंग में 19 विधायक, 7 एमएलएसी शामिल हुए थे. 

बैठक में कथित रूप से कुमारस्वामी ने सभी नेताओं से बीजेपी के साथ जाने पर सुझाव मांगा, जिसमें अधिकांश नेता बीजेपी के साथ जाने पर सहमत थे. इसके बाद कुमारस्वामी ने केरल में बीजेपी के साथ मिलकर लड़ने की घोषणा कर दी.

कुमारस्वामी गठबंधन पर बातचीत के लिए दिल्ली आ गए. बीजेपी हाईकमान ने जेडीएस और बीजेपी गठबंधन तय करने की जिम्मेदारी गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को दे दी.

सावंत के मुताबिक पहले वे एचडी देवेगौड़ा से मिले और फिर वहां से सहमति मिलने के बाद उन्होंने आगे की रणनीति पर काम शुरू की. 8 सितंबर को बीएस येदियुरप्पा ने पहली बार इस गठबंधन की घोषणा की. येदियुरप्पा ने घोषणा में जेडीएस के 4 सीटों पर लड़ने की बात कही.

घोषणा से पहले येदियुरप्पा के आवास पर विधायकों की एक बैठक बुलाई गई थी. हालांकि, मीटिंग का एजेंडा सामने नहीं आ पाया.

बीएस येदियुरप्पा ने 11 सितंबर 2023 को एचडी कुमारस्वामी से मुलाकात भी की. यहां बातचीत फाइनल होने के बाद कुमारस्वामी दिल्ली आ गए, जहां सीधे अमित शाह से मिले. 

कर्नाटक में कांग्रेस का मिशन-20 क्या है?
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने लोकसभा के लिए 20 सीट जीतने का लक्ष्य रखा. कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कार्यकर्ताओं से कहा कि 20 सांसद जिताकर इस बार दिल्ली भेजना है.

कर्नाटक में लोकसभा की कुल 28 सीटें हैं और पिछली बार 25 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट पर जीत मिली थी. 2019 में कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर चुनाव लड़ा था.

कांग्रेस ने 21 और जेडीएस ने 7 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. अभी कांग्रेस सिर्फ सर्वोदय पार्टी के साथ गठबंधन में है. पार्टी को सीपीआई ने बिना शर्त समर्थन मिला हुआ है. पार्टी को मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने घरवापसी अभियान की भी शुरुआत की है.

इसके तहत पुराने कांग्रेसी को पार्टी में वापस शामिल किया जा रहा है. दिल्ली फतह के लिए कांग्रेस ने सितंबर के शुरुआत में ही कर्नाटक में पहला कैंपेन लॉन्च कर दिया है. 

डीके शिवकुमार के मिशन पर फिरेगा पानी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जेडीएस और बीजेपी के गठबंधन से कांग्रेस को कितना नुकसान होगा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं…

जेडीएस के पास करीब 15 प्रतिशत वोट- कर्नाटक चुनाव के आंकड़े को देखा जाए, तो राज्य में जेडीएस के पास करीब 15 प्रतिशत वोट है. 2023 के चुनाव में जेडीएस को 19 सीट और 13.29 प्रतिशत वोट मिले. 

हासन, मैसूरू, तुमकुरु और कोलार में पार्टी ने बीजेपी के मुकाबले बढ़िया परफॉर्मेंस किया. 

जेडीएस की वजह से करीब 20-25 सीटों पर बीजेपी चुनाव हार गई. यानी विधानसभा चुनाव में दोनों साथ रहती, तो विधानसभा का समीकरण अभी कुछ और रहता. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 36% और कांग्रेस को 42% वोट मिले हैं. 

जेडीएस और बीजेपी का वोट जोड़ दिया जाए, तो यह 50 प्रतिशत से अधिक है. जो कांग्रेस के वोट प्रतिशत से 8 फीसदी ज्यादा है. ऐसे में चुनाव में कई सीटों पर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है. 

लोकसभा की 5 सीटों पर मजबूत पकड़- 2019 में कांग्रेस के साथ मिलकर जेडीएस ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में पार्टी ने बिजापुर, उत्तर कन्नड़, शिमोगा, हासन, उडुपी-चिकमंगलूर, तुमकुर और मांड्या सीट पर प्रत्याशी खड़े किए थे. 

जेडीएस तो 5 में से सिर्फ एक सीट हासन पर जीत मिली. इस सीट से एचडी रेवन्ना के पोते प्रांजल रेवन्ना चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. हालांकि,6  सीटों पर पार्टी ने कड़ी टक्कर दी थी. 4 सीटों पर तो हार का मार्जिन काफी कम था. 

तुमकुर सीट पर एचडी देवेगौड़ा सिर्फ 13 हजार वोटों से चुनाव हारे मांड्या से निखिल स्वामी को 1 लाख वोटों से हार मिली थी. विधानसभा चुनाव में भी इन इलाकों में पार्टी का परफॉर्मेंस बेहतरीन रहा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने जेडीएस सूत्रों के हवाले से बताया कि पार्टी गठबंधन में कम से कम 5 सीट लड़ना चाहती है, जिस पर लगभग सहमति भी बन गई है. जेडीएस ने तुमकुरु, हासन, मंड्या, चिक्कबलपुर और बेंगलुरु ग्रामीण सीट पर दावा ठोका है.

सवर्ण और नॉन कुरबा ओबीसी वोट नहीं बंटेगा- सीएसडीएस-लोकनीति के मुताबिक कर्नाटक चुनाव में सवर्ण वोट इस बार बंट गए. बीजेपी को इस समुदाय के सबसे अधिक 60 प्रतिशत, कांग्रेस को 22 प्रतिशत और जेडीएस को 14 प्रतिशत वोट मिले.

इसी तरह नॉन कुरबा ओबीसी वोट भी बीजेपी को 37 प्रतिशत, जेडीएस को 17 प्रतिशत और कांग्रेस को 34 प्रतिशत मिले. जेडीएस को वोक्कलिगा का भी 17 प्रतिशत वोट मिले. देवेगौड़ा वोक्कालिगा समुदाय से ही आते हैं. 

कर्नाटक में वोक्कालिगा की आबादी 11 प्रतिशत है, जो लिंगायत और मुसलमान के बाद सबसे ज्यादा है. जेडीएस को 14 प्रतिशत मुस्लिम वोट भी 2023 के चुनाव में मिले थे. वोक्कालिगा और नॉन कुरबा ओबीसी जेडीएस के कोर वोटर्स माने जाते हैं. 

बीजेपी के साथ अगर यह जाते हैं, तो कांग्रेस को इसका नुकसान हो सकता है.

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