जाति सर्वे: मुसलमानों को लेकर भी पता चल गई बहुत बड़ी सच्चाई, अब तक फैलाया जा रहा था भ्रम

जातीय सर्वे के मुताबिक बिहार में करीब 17.70 प्रतिशत मुसलमान हैं. सामान्य श्रेणी यानी जनरल कैटेगरी के मुसलमानों में शेखों की संख्या सबसे ज्यादा है, तो वहीं पसमांदा श्रेणी में अंसारी शीर्ष स्थान पर हैं.

एक ही सफ़ में खड़े हो गए महमूद-ओ-अयाज़,

ना कोई बंदा रहा ना कोई बंदा नवाज़.

उर्दू के मशहूर शायर अल्लामा इकबाल ने अपनी इस शायरी के जरिए दुनिया भर में एक पैगाम पहुंचाया था कि इस्लाम धर्म के सभी मानने वाले एक समान हैं और उनमें किसी तरह की कोई ऊंच-नीच नहीं है. इस शायरी का मतलब है बादशाह महमूद गजनवी और उनके गुलाम अयाज मलिक जब नमाज पढ़ने के लिए खड़े होते हैं तो एक ही साथ होते हैं .

ऐसे में मिथक ये भी है कि मुस्लिम समाज में कोई जाति और कोई भेदभाव नहीं है.  बिहार में 2 अक्टूबर को जारी हुए जातीय सर्वे के आंकड़ों ने मुसलमानों के बीच जातिविहीन समाज के मिथक को पूरी तरह खारिज दिया है. दरअसल गणना में भाग लेने वाले मुसलमान समुदाय के लोगों ने अपनी जाति भी बताई है, जिसे देखकर पता चलता है कि हिंदुओं की तरह ही मुस्लिम समाज भी जातियों में बंटा हुआ है.

जातीय सर्वे के मुताबिक बिहार में करीब 17.70 प्रतिशत मुसलमान हैं. इनमें सामान्य श्रेणी यानी जनरल कैटेगरी के मुसलमानों में शेखों की संख्या सबसे ज्यादा है, तो वहीं पसमांदा श्रेणी में अंसारी शीर्ष स्थान पर हैं.

जानते हैं मुसलमानों की अगड़ी जातियों के बारे में…

मुसलमानों में भी अगड़ी और पिछड़ी जातिया हैं. सवर्ण जाति के मुसलमानों को तीनों वर्गों में बांटा गया है. ये हैं सैयद, शेख और पठान. सर्वे में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार अगड़ी जाति में सबसे ज्यादा संख्या शेख मुसलमानों की है. प्रदेश में शेख मुसलामानों की तादाद 3.8217 प्रतिशत है. दूसरे स्थान पर आते हैं पठान जिनकी संख्या कुल आबादी में 0.7548 फीसदी हैं. सैय्यदों आबादी 0.2279 प्रतिशत है.

पासमांदा श्रेणी में आती हैं ये जातियां

पिछड़ी जातियों में मदारी, नालबंद, सुरजापुरी, अंसारी और मलिक मुस्लिम शामिल हैं. जनगणना की आंकड़ों के अनुसार इनमें से सबसे ज्यादा आबादी मोमिन अंसारी की है. बिहार में अंसारी मुसलमान  3.545 प्रतिशत हैं. वहीं दूसरी बड़ी आबादी सुरजापुरी मुस्लिम (1.87 प्रतिशत) की है. वहीं तीसरी नंबर पर धुनिया मुसलमान हैं जिनकी आबादी 1.42 प्रतिशत है. बाकी के 7 प्रतिशत मुसलमानों की लगभग 25 जातियां शामिल हैं.

पिछड़ी जाति के मुसलमान सबसे ज्यादा

पिछड़ी जाति में आने वाले चिक मुस्लिमों की जनसंख्या राज्य में 0.0386 फीसदी, कसाई 0.1024 प्रतिशत, डफली 0.056 प्रतिशत, धुनिया 1.4291 फीसदी, नट 0.0471 पर्सेंट, पमरिया 0.0496 प्रतिशत, भटियारा 0.0209 प्रतिशत, भाट 0.0681 प्रतिशत और मेहतर 0.0535 प्रतिशत हैं.

इसके अलावा मिरियासीन की आबादी 0.0118 फीसदी, मदारी 0.0089 फीसदी, मिर्शिकार 0.051 प्रतिशत, फकीर 0.5073 प्रतिशत हैं, जबकि चूड़ीहार की जनसंख्या 0.159 पर्सेंट, राईन 1.3988 प्रतिशत, ठकुराई 0.1128 प्रतिशत,  शेरशाहबादी 0.9965 फीसदी, बखो 0.0282 प्रतिशत और दर्जी 0.2522 प्रतिशत हैं.

सिकलीगर मुस्लिमों की तादाद बिहार में 0.0145 फीसदी, रंगरेज 0.0332 फीसदी, मुकेरी 0.0432 फीसदी, गादेरी 0.0072 पर्सेंट, कुल्हैया 0.9591, जाट 0.0344, धोबी 0.3135 प्रतिशत, सेखदा 0.1904 प्रतिशत, गद्दी 0.0441, लालबेगी की आबादी 0.0021 और हलालखोर की जनसंख्या 0.0058 फीसदी है.

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