अखिलेश ने 11 सीट दिए, कांग्रेस 16 पर अड़ी: 4 प्वॉइंट्स में समझिए यूपी में सीट बंटवारे का पूरा सिनेरियो

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस यूपी में कम से कम 20 प्रतिशत यानी 16 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, इसलिए पार्टी अभी अखिलेश को मनाने में जुटी है. 

बिहार में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में 11 सीट देने की घोषणा की है. हालांकि, कांग्रेस अखिलेश की इस घोषणा से संतुष्ट नहीं है और कहा है कि अभी बातचीत फाइनल नहीं हुई है. 

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यूपी में सीट बंटवारे को लेकर अशोक गहलोत सपा मुखिया अखिलेश यादव से बातचीत कर रहे हैं. जब सबकुछ फाइनल हो जाएगा, तो हम जनता को इसके बारे में बता देंगे. 

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस यूपी में कम से कम 20 प्रतिशत यानी 16 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, इसलिए पार्टी अभी अखिलेश को मनाने में जुटी है. 

यूपी में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं और इंडिया गठबंधन के भीतर 2 पार्टी की तस्वीर साफ हो गई है. सपा ने इससे पहले जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी को 7 सीटें देने की घोषणा की थी.

सपा ने कौन-कौन सी सीटें कांग्रेस को दी है?
सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने जिताऊ उम्मीदवार को देखकर ही कांग्रेस को 11 सीट देने का फैसला किया है. समझौते के तहत सपा ने कांग्रेस को रायबरेली, अमेठी, वाराणसी, खीरी, कुशीनगर, कानपुर, बाराबंकी, फतेहपुर सीकरी, सहारनपुर और सीतापुर सीट देने की बात कही है. 

2019 में कांग्रेस इनमें से सिर्फ रायबरेली सीट पर जीत हासिल कर पाई थी. पार्टी अमेठी, कानपुर और फतेहपुर सीकरी सीट पर दूसरे नंबर पर रही थी. अमेठी सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता राहुल गांधी चुनाव मैदान में थे.

2014 में कांग्रेस ने रायबरेली और अमेठी सीट पर जीत दर्ज की थी और पार्टी कुशीनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, कानपुर जैसी सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी. 

हालांकि, कांग्रेस की कोशिश 2009 के रिजल्ट के आधार पर सीट बंटवारे की थी. 2009 में पार्टी को 21 सीटों पर जीत मिली थी. 

सीट बंटवारे से कांग्रेस संतुष्ट क्यों नहीं है?
सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव के ऐलान से कांग्रेस के संतुष्ट नहीं होने की 3 मुख्य वजहें हैं- 

1. कांग्रेस ने अखिलेश यादव को 20 सीटों की एक सूची दी थी. पार्टी को उम्मीद थी कि अखिलेश कम से कम 16 सीटों पर हरी झंडी देंगे, लेकिन अखिलेश ने सिर्फ 11 सीट देने का ऐलान किया है. 

2. कांग्रेस समझौते के तहत कुछ मुस्लिम बहुल सीट (जैसे- अमरोहा, अलीगढ़ आदि) भी अपने पास चाहती है, लेकिन सहारनपुर को छोड़कर बाकी सीट अखिलेश देने को तैयार नहीं हैं. नाराजगी की यह भी एक वजह है.

अखिलेश क्यों नहीं दे रहे कांग्रेस को ज्यादा सीट?
एक इंटरव्यू के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था कि जिताऊ उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस आगे आए, हम सीट देने को तैयार हैं. यादव ने कहा था कि सीट बंटवारे का सिर्फ एक ही फॉर्मूला है- जिताऊ उम्मीदवार.

सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने कांग्रेस को यूपी से राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लड़ाने का प्रस्ताव दिया था. अखिलेश का कहना था कि अगर खरगे यूपी में चुनाव लड़ेंगे, तो मायावती का दलित वोटबैंक में सेंध लग सकता है.

सपा ने खरगे के चुनाव लड़ने के लिए इटावा और बाराबंकी सीट का नाम भी सुझाया था. हालांकि, कांग्रेस इस पर राजी नहीं हुई. 

सपा सूत्रों का कहना है कि अमेठी से राहुल गांधी चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह भी अभी साफ नहीं है. ऐसे में कांग्रेस को अगर ज्यादा सीट लड़ने के लिए दी जाती है, तो वहां पहले ही मुकाबले में बीजेपी लीड ले लेगी.

हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि अखिलेश का ऐलान राजनीतिक दबाव बनाने के लिए संभव है.

कांग्रेस नेता और वाराणसी से पूर्व सांसद राजेश मिश्रा एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहते हैं- अभी हाईकमान स्तर से बातचीत चल ही रही है, तो ऐलान का कोई मतलब नहीं है. बिहार में राजनीतिक उठापटक के मद्देनजर यह दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है. 

यूपी में कांग्रेस के पास कितना जनाधार?
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति काफी खराब है. 2022 के विधानसभा चुनाव में ओल्ड ग्रैंड पार्टी को सिर्फ 2 सीटें मिली और पार्टी का वोट प्रतिशत 2.85 प्रतिशत पर ही सिमट गया.

2019 के चुनाव में कांग्रेस को यूपी में 6.36 प्रतिशत वोट मिला था. 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत 6.25 था. 2014 में कांग्रेस को 7.53 प्रतिशत वोट मिले थे.  

यानी पिछले 4 चुनाव का रिकॉर्ड देखा जाए, तो कांग्रेस का वोट प्रतिशत 8 प्रतिशत से भी कम है. 

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